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की सीमाओं की कोई बाधा माने बिना, मौखिक या लिखित अथवा मुद्रित रूप में कला के रूप में या बच्चे की पसंद के अन्य माध्यमों से सभी प्रकार की जानकारी और
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विचार प्राप्त करने और संप्रेषित करने का प्रयत्न करने तथा उन्हें प्राप्त और संप्रेषित
करने की स्वतंत्रता के अधिकार का समावेश होगा । 6 किसी भी बच्चे के निजी पन, परिवार या घर या पत्र -व्यवहार में मनमाना या गैर
कानूनी हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा और न उसके सम्मान और प्रतिष्ठा पर कोई गैरकानूनी प्रहार किया जाएगा । बच्चे के अपने माता पिता या दोनों या कानूनी अभिभावकों या उसकी देखभाल के लिए जिम्मेदार किसी अन्य व्यक्ति की देख-रेख में रहते हुए उसे सभी प्रकार की शारीरिक या मानसिक हिंसा से चोट या दुरूपयोग से, उपेक्षा या उदासीन व्यवहार से, दुर्व्यवहार या शोषण से, जिसमें लैंगिक दुर्व्यवहार भी शामिल है, बचाने के लिए पक्षकार राज्य सभी उपयुक्त वैधानिक, प्रशासनिक, सामाजिक और शैक्षिक उपाय करेंगे। यह राज्य सरकारों का दायित्व है कि मानसिक या शारीरिक दृष्टि से विकलांग बच्चे को ऐसी परिस्थितियों में सर्वागीण और श्रेष्ठ जीवन जीना चाहिए जो मानवीय गरिमा सुनिश्चित करने वाली, स्वावलंबन को बढ़ावा देने वाली और समाज में ऐसे बच्चे की
सक्रिय भागीदारी का मार्ग सुगम बनाने ‘ हो । 9 सभी राज्य बच्चों के स्वास्थ्य के लिए हानिकर पारंपरिक प्रथाओं को समाप्त करने के
लिए प्रभावकारी और उपर्युक्त उपाय करेंगे । 10 जिन राज्यों में नृजातीय, धार्मिक या भाषाई अल्पसंख्यक समुदाय या मूलवासी समूहों
के लोग रहते हैं। 11 उसमें ऐसे अल्पसंख्यक समुदाय या मूलवासी समूह के बच्चे को अपने समुदाय या
समूह के अन्य सदस्यों के साथ अपनी संस्कृति का उपभोग करने, अपने धर्म को मानने या उसका आचरण करने अथवा अपनी भाषा का उपयोग करने के अधिकार से
वंचित नहीं किया जाएगा । 12 नशीली दवाओं तथा मनः-प्रभावी (साइकोट्रॉपिक) पदार्थों की प्रासंगिक अन्तर्राष्ट्रीय
संधियों में जो परिभाषाएं की गई है उन परिभाषाओं के अन्तर्गत आने वाली ऐसी दवाओं या पदार्थों के निषिद्ध उपयोग से बच्चों को बचाने के लिए तथा ऐसे पदार्थों के निषिद्ध उत्पादन तथा व्यापार में बच्चों के उपयोग को रोकने के लिए पक्षकार राज्य
वैधानिक, प्रशासनिक, सामाजिक और शैक्षिक सभी उपरोक्त उपयुक्त उपाय करेंगे । स्व मूल्यांकन प्रश्न
1 संयुक्त चष्ट महासभा में मानवाधिकारों की घोषणा का लक्ष्य बताइये । 2 मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता हेतु किए गए प्रभावशाली प्रयासों के नाम दीजिए । 3 शिक्षा का उद्देश्य तो व्यक्ति का बौद्धिक, मानसिक, नैतिक शारीरिक अर्थात सर्वागिण
। विकास कर सृष्टि को सम्पदा बनना है । स्पष्ट करें । मानवाधिकर : शिक्षा का उद्देश्य
मानवाधिकार शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य है मानवों में सनागरिकों के गुणों का विकास कर उन्हे आदर्श मानव बनाना जिसकी प्राप्ति हेतु निम्न प्रमुख उद्देश्य निर्धारित किये जाते हैं :
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1. मानवाधिकार शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य मानवों के अन्तःकरण को शुद्ध, सात्विक सरल व
अहिंसात्मक ढंग से युक्त व्यवहार करने के योग्य बनाना है ।। 2. मानवाधिकार शिक्षा का उद्देश्य नागरिकों की सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करना,
पर्यावरण की रक्षा करना और उत्पादन, उपभोग के ऐसे मार्ग सिखाना है जो देश के
स्थाई विकास में योगदान कर सकें । 3. मानवाधिकार शिक्षा का उद्देश्य मानवाधिकार स्वतन्त्रता को समझने की नागरिकों में
योग्यता उत्पन्न कर चुनौतियों का सामना करने में कौशल का विकास करना है । 4. मानवाधिकार शिक्षा का उद्देश्य संतुलित और दीर्घकालिक विकास के परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रीय
और अन्तर्राष्ट्रीय स्तरों पर समन्वय और समानता की भावना विकसित करना है । 5. मानवाधिकार शिक्षा का उद्देश्य नागरिकों में अपने मार्ग के चयन का ज्ञान विवेक
सम्मत तरीके से करने की योग्यता का विकास करना ।। 6. शिक्षा को उन मूल्यों को समझने व स्वीकार करने की योग्यता का विकास करना
चाहिये जो व्यक्तियों, लिगो व संस्कृतियों की अनेकता के उपरान्त भी सभी में समान.
रूप से विद्यमान रहते हैं । 7. प्रत्येक व्यक्ति में सार्वजनिक मूल्यों की भावना व व्यवहार को विकसित करना जिससे
विश्व में शान्ति स्थापित की जा सके । मानवाधिकार शिक्षा का उद्देश्य है शान्ति,
सद्भाव, प्रेम, सहिष्णुता जैसे गुणों पर आधारित सुन्दर समाज का निर्माण । 7.4 भारतीय शिक्षा पर मानवाधिकार का प्रभाव
मानव अधिकार में ज्ञान की आधारशिला या भावना का बीजारोपण प्राथमिक स्तर पर ही करना आवश्यक है क्योंकि इस अवस्था का प्रभाव बालक के सम्पूर्ण व्यक्तित्व व कृतित्व पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है । राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी इस तथ्य पर ध्यान केन्द्रित किया गया कि शिक्षण का आधार बाल केन्द्रित शिक्षा होना चाहिये । शिक्षा नीति के अनुसार प्राथमिक शिक्षा में प्रारम्भिक चरणों में सीखने के अभिन्न अंग के रूप में खेल विधि, क्रिया विधि ज्यादा प्रभावी रहती है । प्रारम्भिक स्तर पर उच्च कक्षा स्तर पर विद्यार्थियों कों वीर और राष्ट्रभक्तों के संदर्भ में वीरांगनाओं की कथाएँ, अधिकार, कर्तव्य की जानकारी, लोकतन्त्र, समाजवाद, धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र आदि के संदर्भ में सम्पूर्ण जानकारी दी जाती है । मानवाधिकार शिक्षा से सम्बद्ध जागृति व जानकारी उपलब्ध करवाने के लिये जनसंचार साधनों का भी अधिकतम उपयोग किया जाता है । इसके अलावा सेमीनार, विचार-विमर्श, वाद-विवाद प्रतियोगिता, प्रतिवेदन तैयार करना आदि के माध्यम से भी मानवाधिकार की शिक्षा दी जा सकती है । इसका व्यापक प्रचार प्रसार हो, इस हेतु क्षेत्रीय भाषण के अनुरूप इनको तैयार करने पर बल दिया जाता है । उच्च स्तर पर विद्यार्थियों में मानवाधिकार का निर्माण कैसे हो?
मनोवैज्ञानिक दृष्टि से उच्च शिक्षा के समय बालक किशोरावस्था को पार कर युवावस्था में प्रवेश करता है जिस कारण उसमें जिम्मेदारी व दायित्व बोध की भावना का पूर्णतया विकास हो जाता है | ऐसे में मानवाधिकारों की सही जानकारी व समझ विकसित करने में यह
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महत्वपूर्ण अवस्था है । उच्च स्तर शिक्षा में मानवाधिकार शिक्षा की विचारधारा उत्पन्न करने के लिये निम्न कार्य किये जा सकते हैं :1. शिक्षकों का आचरण एवं व्यवहार मर्यादित गरिमापूर्ण हो । राजनैतिक गुटबन्दी व
दलवादी या पक्षपातपूर्ण विचारधारा को महाविद्यालय में स्थान ना दिया जाये । 2. पाठ्यक्रम समाज की आवश्यकता. एवं माँग को ध्यान में रखकर तैयार किया जाये व
समाज के सभी स्तर के व्यक्तियों से सहयोग लिया जाये ।। 3. उच्च स्तर पर अध्यापन कार्य करने वाले शिक्षकों को भी मानवाधिकार के प्रति चेतना
रखनी चाहिये । 4. महाविद्यालय का वातावरण पूर्णतः प्रजातान्त्रिक, सामाजिक समरसता पर आधारित
होना चाहिये । महाविद्यालय में पाठ्य सहगामी प्रवृतियों का आयोजन कर विद्यार्थी

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